
हेपेटाइटिस-B की रैपिड जांच में 48 और हेपेटाइटिस-C में 19 लोग पॉजिटिव; एलिसा जांच में भी मिले संक्रमण के मामले, वायरल लोड जांच से संक्रमण की स्थिति का आकलन
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अगस्त 2026 में सिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने की जांच | विशेषज्ञों ने समय पर पहचान, वैज्ञानिक उपचार और बचाव के उपायों को बताया जरूरी
बिलासपुर, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में वायरल हेपेटाइटिस की जांच के दौरान संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं। संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C की रैपिड स्क्रीनिंग में कुल 4,170 जांचें की गईं। इनमें हेपेटाइटिस-B के 48 और हेपेटाइटिस-C के 19 लोग पॉजिटिव पाए गए। इसके अलावा एलिसा और वायरल लोड जांच में भी संक्रमण से जुड़े मामले सामने आए हैं। हेपेटाइटिस-A और हेपेटाइटिस-E की भी जांच की गई।
ये आंकड़े राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित जांच गतिविधियों से संबंधित हैं। हालांकि, अलग-अलग जांच पद्धतियों और चरणों में सामने आए पॉजिटिव परिणामों को जोड़कर संक्रमित व्यक्तियों की कुल संख्या निर्धारित नहीं की जा सकती, क्योंकि अलग-अलग चरणों में एक ही व्यक्ति की जांच दोबारा भी हो सकती है।
सिम्स प्रबंधन के अनुसार, वायरल हेपेटाइटिस की समय पर पहचान, संक्रमण की स्थिति का आकलन और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार उपचार गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खासकर हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C के संक्रमण शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षणों के बिना भी रह सकते हैं। ऐसे में जोखिम की स्थिति में जांच कराना और पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
रैपिड जांच में हेपेटाइटिस-B के 48 और हेपेटाइटिस-C के 19 पॉजिटिव
सिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस-B की रैपिड जांच में 2,087 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 48 लोग पॉजिटिव पाए गए। वहीं, हेपेटाइटिस-C की रैपिड जांच में 2,083 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 19 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव रही।
इस तरह दोनों संक्रमणों की रैपिड जांच के तहत कुल 4,170 स्क्रीनिंग दर्ज की गईं। इन परिणामों के आधार पर संक्रमण की पहचान के लिए आगे की जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन की आवश्यकता महत्वपूर्ण हो जाती है।
रैपिड जांच में पॉजिटिव परिणाम आने का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि व्यक्ति में सक्रिय संक्रमण की अंतिम पुष्टि हो गई है। संबंधित संक्रमण और जांच के प्रकार के अनुसार चिकित्सक अतिरिक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।
एलिसा जांच में भी सामने आए पॉजिटिव परिणाम
रैपिड स्क्रीनिंग के अलावा सिम्स में हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C की एलिसा जांच भी की गई। रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस-B की एलिसा जांच में 77 लोगों की जांच की गई, जिनमें 63 पॉजिटिव मिले।
इसी तरह हेपेटाइटिस-C की एलिसा जांच में 38 लोगों की जांच हुई, जिनमें 30 लोगों के परिणाम पॉजिटिव रहे।
एलिसा यानी एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट ऐसे परीक्षणों की एक पद्धति है, जिसका उपयोग संबंधित संक्रमण के संकेतों की पहचान के लिए किया जाता है। हालांकि, हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C में जांच के परिणामों का अर्थ संबंधित परीक्षण के प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए रिपोर्ट का चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार आगे की जांच महत्वपूर्ण है।
वायरल लोड जांच में हेपेटाइटिस-B के 25 पॉजिटिव, हेपेटाइटिस-C में नहीं मिला पॉजिटिव परिणाम
सिम्स की रिपोर्ट में वायरल लोड जांच के आंकड़े भी शामिल हैं। हेपेटाइटिस-B के लिए 42 लोगों की वायरल लोड जांच की गई, जिनमें 25 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव रही।
वहीं, हेपेटाइटिस-C की वायरल लोड जांच में 12 लोगों की जांच की गई और किसी का भी परिणाम पॉजिटिव दर्ज नहीं हुआ।
वायरल लोड जांच का उपयोग संबंधित वायरस की आनुवंशिक सामग्री की मौजूदगी और मात्रा का आकलन करने के लिए किया जाता है। हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C में यह जांच चिकित्सकीय स्थिति समझने तथा उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
हालांकि, वायरल लोड जांच में पॉजिटिव या निगेटिव परिणाम की व्याख्या संबंधित परीक्षण, पहले की रिपोर्ट और व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल इन आंकड़ों के आधार पर सभी जांच कराए गए लोगों की बीमारी की स्थिति के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
हेपेटाइटिस-A के 57 और हेपेटाइटिस-E के 52 लोगों की जांच
सिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने हेपेटाइटिस-A और हेपेटाइटिस-E की भी जांच की।
रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस-A के 57 लोगों की जांच की गई, जिनमें एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया। वहीं, हेपेटाइटिस-E की जांच में 52 लोगों के नमूनों का परीक्षण किया गया और कोई पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ।
हेपेटाइटिस के अलग-अलग प्रकारों के संक्रमण के तरीके, जांच की प्रक्रिया और बचाव के उपायों में अंतर हो सकता है। इसलिए मरीजों की स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श और जांच के परिणामों का उचित मूल्यांकन आवश्यक है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शुरुआती अवस्था में संक्रमण की पहचान जरूरी : डॉ. रमणेश मूर्ति
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम में समय पर जांच, सही निदान और वैज्ञानिक उपचार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने बताया कि माइक्रोबायोलॉजी के दृष्टिकोण से हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C के कई संक्रमण शुरुआती अवस्था में बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकते हैं। ऐसे में जांच के माध्यम से संक्रमण की पहचान करना और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आगे की जांच कराना बेहद जरूरी है।
डॉ. मूर्ति के अनुसार, हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C की पुष्टि तथा संक्रमण की स्थिति का आकलन करने के लिए आवश्यकतानुसार एलिसा और वायरल लोड जैसी जांचें कराई जाती हैं। इनके परिणाम चिकित्सकों को उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस-B से बचाव के लिए टीकाकरण प्रभावी उपाय है, जबकि हेपेटाइटिस-C का उपचार उपलब्ध दवाओं से संभव है। लोगों को बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए।
उन्होंने सिम्स में संचालित राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम को संक्रमण की पहचान, मरीजों को उपचार से जोड़ने और जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। साथ ही आम नागरिकों से रक्तदान, इंजेक्शन और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के दौरान सुरक्षित तरीकों का पालन करने की अपील की।
स्वच्छ पानी, सुरक्षित भोजन और स्टरलाइज्ड सुई का उपयोग जरूरी : डॉ. रेखा बारापात्रे
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा बारापात्रे ने बताया कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए स्वच्छ पानी, सुरक्षित भोजन, हाथों की नियमित सफाई, सुरक्षित रक्त और स्टरलाइज्ड सुई का उपयोग जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस-B से बचाव के लिए टीकाकरण कराना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसे विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आगे की जांच और आवश्यक उपचार कराना चाहिए।
उनके अनुसार, संक्रमण की पहचान होने के बाद चिकित्सकीय सलाह का पालन करना और बचाव के उपाय अपनाना बीमारी के प्रभाव को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
हेपेटाइटिस-B और C में क्या अंतर है?
वायरल हेपेटाइटिस वायरस के कारण होने वाला ऐसा संक्रमण है, जो मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करता है। इसके अलग-अलग प्रकारों के संक्रमण के तरीके और उपचार की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
हेपेटाइटिस-B: यह संक्रमित रक्त और शरीर के कुछ तरल पदार्थों के संपर्क से फैल सकता है। संक्रमित मां से बच्चे में संक्रमण होने की आशंका भी रहती है। इससे बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है। कुछ मरीजों में संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है और लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
हेपेटाइटिस-C: यह मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है। इसके लिए अभी व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से अधिकांश मरीजों का उपचार संभव है।
हेपेटाइटिस-A और E: इनका संक्रमण सामान्यतः दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और भोजन की साफ-सफाई इनके बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन संक्रमणों में भी कुछ परिस्थितियों में गंभीर बीमारी हो सकती है, इसलिए लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञों के अनुसार, वायरल हेपेटाइटिस से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ सुरक्षित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन भी जरूरी है।
स्वच्छ पानी पिएं: दूषित पानी से फैलने वाले हेपेटाइटिस-A और E के जोखिम को कम करने के लिए सुरक्षित पेयजल का उपयोग करें।
भोजन की स्वच्छता रखें: भोजन को साफ-सुथरे तरीके से तैयार करें और खाने से पहले हाथ धोएं।
हेपेटाइटिस-B का टीका लगवाएं: टीकाकरण संक्रमण से बचाव का प्रभावी माध्यम है।
सुरक्षित इंजेक्शन सुनिश्चित करें: इंजेक्शन के लिए नई या उचित रूप से स्टरलाइज्ड सुई और सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल होना चाहिए।
सुरक्षित रक्त का उपयोग करें: रक्त चढ़ाने से पहले निर्धारित जांच और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।
पॉजिटिव रिपोर्ट को नजरअंदाज न करें: विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यकतानुसार आगे की जांच और उपचार कराएं।
स्वयं दवा लेने से बचें: बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार कराएं।
आंकड़ों पर एक नजर
जांच का प्रकारकुल जांचपॉजिटिव परिणामहेपेटाइटिस-B रैपिड जांच2,08748हेपेटाइटिस-C रैपिड जांच2,08319हेपेटाइटिस-B एलिसा जांच7763हेपेटाइटिस-C एलिसा जांच3830हेपेटाइटिस-B वायरल लोड4225हेपेटाइटिस-C वायरल लोड120हेपेटाइटिस-A जांच571हेपेटाइटिस-E जांच520
महत्वपूर्ण तथ्य: ये आंकड़े अगस्त 2026 में अलग-अलग जांच पद्धतियों के तहत दर्ज जांचों और पॉजिटिव परिणामों को दर्शाते हैं। इन्हें अलग-अलग संक्रमित व्यक्तियों की कुल संख्या नहीं माना जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि अलग-अलग जांच श्रेणियों में कितने मरीजों की दोबारा जांच हुई।
बड़ी तस्वीर: समय पर जांच से लिवर की गंभीर बीमारियों का जोखिम कम करने में मदद
वायरल हेपेटाइटिस की चुनौती केवल संक्रमण की पहचान तक सीमित नहीं है। कई मामलों में शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे संक्रमण का पता देर से चल सकता है। लंबे समय तक बने रहने वाले हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C संक्रमण से लिवर में गंभीर क्षति, सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे में जांच, संक्रमण की उचित पुष्टि, चिकित्सकीय निगरानी और समय पर उपचार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सिम्स में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत की जा रही जांच गतिविधियां इसी दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
