

बिलासपुर, 13 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के अस्थि रोग विभाग में मंगलवार को बीएमडी (बोन मिनरल डेंसिटी) जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 250 मरीजों की हड्डियों की जांच की गई। शिविर का उद्देश्य हड्डियों की कमजोरी की पहचान करने के साथ लोगों को हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने भी अपनी हड्डियों की जांच कराई। दोनों अधिकारियों ने स्वयं जांच कराकर हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के महत्व का संदेश दिया।
चिकित्सकों ने बताया कि बढ़ती उम्र, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित दिनचर्या के कारण हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। हड्डियों में खनिज घनत्व कम होने से फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कई बार शुरुआती अवस्था में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए समय पर जांच कराना महत्वपूर्ण है।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली और समय पर स्वास्थ्य जांच से हड्डियों से जुड़ी समस्याओं की पहचान करने में मदद मिलती है। लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहते हुए नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाना चाहिए।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि ऐसे जांच शिविर आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने लोगों से समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने की अपील की।
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ए.आर. बेन ने कहा कि बीएमडी जांच हड्डियों में खनिज घनत्व का आकलन करने में सहायक है। हड्डियों की कमजोरी का समय पर पता चलने से मरीज को उचित चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक उपचार दिया जा सकता है।
शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन-डी युक्त संतुलित आहार, नियमित व्यायाम तथा स्वस्थ दिनचर्या अपनाना आवश्यक है। पर्याप्त धूप लेना और शारीरिक गतिविधियों को नियमित जीवन का हिस्सा बनाना भी लाभकारी हो सकता है। कैल्शियम, विटामिन-डी एवं अन्य खनिजों के पूरक आहार का सेवन चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
चिकित्सकों ने विशेष रूप से बुजुर्गों और हड्डियों की कमजोरी की आशंका वाले लोगों को समय पर जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हड्डियों से संबंधित परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर जांच और उचित उपचार से फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस अवसर पर डॉ. भूपेंद्र कश्यप, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ठाकुर, डॉ. प्रमोद जायसवाल, डॉ. संजय गिल्ले, डॉ. सोमेश शुक्ला सहित पीजी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
