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बिलासपुर के मल्हार स्कूल में फिर भड़का आक्रोश, कलेक्ट्रेट घेरा, FIR की मांग पर अड़े छात्र, अफसर करते रहे मान-मनुहार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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एक्सपायरी सैनिटरी पैड बांटने और मुफ्त पैड बेचने के आरोपों पर कार्रवाई की मांग, डीईओ और दोषी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे विद्यार्थी

प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजने की कार्रवाई से छात्र संतुष्ट नहीं, बोले—सिर्फ हटाने से न्याय नहीं मिलेगा, जिम्मेदारों पर दर्ज हो अपराध

बिलासपुर। मल्हार के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं को कथित तौर पर एक्सपायरी सैनिटरी पैड बांटने, मुफ्त वितरण के लिए आए पैड बेचने और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले में मंगलवार को एक बार फिर विरोध भड़क उठा। स्कूल के विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे, वहीं जिला प्रशासन के अधिकारी उन्हें समझाने और मनाने की कोशिश करते रहे। लेकिन विद्यार्थियों का कहना था कि प्राचार्य और शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज देना कार्रवाई का अंत नहीं हो सकता। मामले में आपराधिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

विद्यार्थियों की नाराजगी की वजह सिर्फ स्कूल में हुई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल भी है। शिकायत के मुताबिक, 7 अगस्त 2026 को छात्राओं को ऐसे सैनिटरी पैड वितरित किए गए, जिन पर सितंबर 2022 की एक्सपायरी तिथि अंकित थी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि विद्यालय प्रबंधन ने इस तथ्य को दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के दौरान स्वीकार भी किया था। इसके अलावा छात्राओं को मुफ्त में बांटे जाने वाले सैनिटरी पैड बेचने का आरोप भी लगाया गया है। विद्यार्थियों की मांग है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

अफसरों की समझाइश, लेकिन एफआईआर की मांग पर अड़े विद्यार्थी

मंगलवार को हुए प्रदर्शन में विद्यार्थियों का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि केवल विभागीय कार्रवाई करके मामले को खत्म नहीं किया जाए। उनकी मांग है कि सैनिटरी पैड वितरण में कथित अनियमितता, मुफ्त सामग्री की बिक्री और छात्राओं के साथ हुए दुर्व्यवहार की अलग-अलग बिंदुओं पर जांच हो। विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका की भी जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी विद्यार्थियों को समझाने और उनकी मांगों पर बातचीत करने में जुटे रहे। हालांकि छात्र एफआईआर की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उनका सवाल था कि जब छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मामले में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है, तो सिर्फ शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजने से जवाबदेही कैसे तय होगी?

2022 में एक्सपायर पैड, 2026 में वितरण का आरोप

शिकायत में सैनिटरी पैड वितरण से जुड़ा मामला सबसे गंभीर मुद्दे के रूप में उठाया गया है। विद्यार्थियों की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को छात्राओं को वितरित किए गए सैनिटरी पैड की एक्सपायरी तिथि सितंबर 2022 अंकित थी। यानी शिकायत में आरोप है कि एक्सपायरी अवधि समाप्त होने के करीब चार साल बाद भी इन पैड का वितरण किया गया।

छात्रों का कहना है कि स्कूल में छात्राओं को मुफ्त में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उद्देश्य उनकी जरूरतों को पूरा करना और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं देना है। ऐसे में यदि एक्सपायरी पैड वितरित किए गए हैं और मुफ्त वितरण के लिए उपलब्ध सामग्री की बिक्री भी हुई है, तो यह केवल विभागीय अनियमितता का मामला नहीं रह जाता। इससे छात्राओं की सुरक्षा, सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही और विद्यालय प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि, पैड की आपूर्ति, भंडारण, एक्सपायरी तिथि और कथित बिक्री से संबंधित सभी तथ्यों की स्वतंत्र जांच तथा जिम्मेदारी का निर्धारण होना बाकी है।

प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई

मामले में जिला प्रशासन ने पहले ही जांच के आधार पर प्राचार्य सहित तीन शिक्षकों को विद्यालय से हटाकर अन्य संस्थानों में कार्य करने के निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के बाद 7 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

जांच के बाद प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला, व्याख्याता रश्मि गुप्ता और व्याख्याता संजय दुबे को दूसरे विद्यालयों में कार्य करने के आदेश दिए गए।

  • वेद प्रकाश शुक्ला, प्राचार्य: मस्तूरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल कुकुर्दीकेरा।
  • रश्मि गुप्ता, व्याख्याता: शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपेड़ी।
  • संजय दुबे, व्याख्याता: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कलेक्टर के अनुमोदन से 9 अक्टूबर को ये आदेश जारी किए थे। यह व्यवस्था राज्य शासन से नियमित स्थानांतरण आदेश जारी होने की प्रत्याशा में की गई है। शासन से अन्य संस्था में पदस्थापना होने के बाद ये आदेश स्वतः निरस्त माने जाएंगे।

जांच में दुर्व्यवहार से लेकर 500 रुपए अतिरिक्त वसूली तक के आरोपों की पुष्टि

जिला प्रशासन की ओर से 10 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार, प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों में अनियमितताओं की शिकायतें जनप्रतिनिधियों तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त हुई थीं। 1 अक्टूबर को छात्राओं ने कलेक्टर के सामने भी अपनी शिकायतें रखकर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

शिकायतों की जांच के लिए 30 सितंबर को तीन सदस्यीय दल गठित किया गया था। दल ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बयान लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी।

जांच प्रतिवेदन में प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला से संबंधित निम्नलिखित अनियमितताओं की पुष्टि होने की जानकारी प्रशासन ने दी थी:

  • विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार।
  • छात्राओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने में अनियमितता।
  • शाला शुल्क के नाम पर प्रति विद्यार्थी 500 रुपए अतिरिक्त राशि वसूलने का मामला।
  • शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन में गंभीर अनियमितताएं।

इसी तरह व्याख्याता रश्मि गुप्ता के संबंध में विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन और अध्यापन कार्य भृत्य से कराने तथा शैक्षणिक दायित्वों में गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई। व्याख्याता संजय दुबे के संबंध में भी विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार और गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने की जानकारी दी गई थी।

जांच दल ने विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए संबंधित शिक्षकों को दूसरी संस्थाओं में भेजने की अनुशंसा की थी।

अब छात्रों का सवाल—विभागीय कार्रवाई हुई, आपराधिक कार्रवाई कब?

शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट और तीन शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजने की कार्रवाई के बाद भी विद्यार्थियों का आक्रोश शांत नहीं हुआ है। मंगलवार के प्रदर्शन में एफआईआर की मांग प्रमुखता से उठी। विद्यार्थियों का तर्क है कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मुफ्त सैनिटरी पैड की आपूर्ति और वितरण की जिम्मेदारी किसकी थी, एक्सपायरी पैड छात्राओं तक कैसे पहुंचे और मुफ्त वितरण के लिए उपलब्ध पैड बेचने के आरोपों की जांच किस स्तर पर हुई।

शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी सहित जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। छात्रों की मांग है कि शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की जांच हो और यदि आपराधिक कृत्य के साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज की जाए।

मामले में विभागीय जांच के आधार पर शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजने की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन विद्यार्थियों की नाराजगी का केंद्र अब आपराधिक जवाबदेही है। मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों की समझाइश के बावजूद छात्रों का एफआईआर की मांग पर अड़े रहना बताता है कि वे केवल प्रशासनिक आदेश से संतुष्ट नहीं हैं।

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