कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने भाजपा विधायक सुशांत खिलाफ पर उठाए सवाल, कलेक्टर से 17 बिंदुओं पर जांच की मांग

कांग्रेस का आरोप—राजनीतिक दबाव में जनप्रतिनिधियों को किया जा रहा परेशान; सीमांकन, अवैध उत्खनन, जर्जर सड़कों और गरीबों के मकानों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया
बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा की राजनीति में भाजपा विधायक सुशांत खिलाफ की कार्यशैली को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। बेलतरा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने क्षेत्र में कथित राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक भेदभाव और विकास कार्यों में हस्तक्षेप को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में जिला कलेक्टर को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में कांग्रेस ने 17 बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराकर समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि “बेलतरा बदलापुर क्यों बन गया है? विधायक के कथित दबाव में प्रशासन इतना असहज क्यों है और आखिर प्रशासन की क्या मजबूरी है?” पार्टी का आरोप है कि क्षेत्र में सड़क, जल निकासी और बिजली बिल जैसी बुनियादी समस्याओं के साथ-साथ निर्वाचित पंचायत एवं नगर निगम प्रतिनिधियों के साथ कथित भेदभाव और अधिकारियों पर दबाव की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
ज्ञापन में कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के प्रति दुर्भावना रखना नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना और क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराना है। हालांकि, विधायक और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनका पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
45 एकड़ जमीन के सीमांकन पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने बेलतरा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और चार बार के निर्वाचित सरपंच धनंजय सिंह से जुड़े सीमांकन प्रकरण को प्रमुखता से उठाया है। ज्ञापन के अनुसार, उनके परिवार की एक ही स्थान पर लगभग 45 एकड़ जमीन है, जिस पर फसल लगी हुई है।
कांग्रेस का आरोप है कि इस जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया में पूर्व सूचना को लेकर सवाल हैं। ज्ञापन में 6 अक्टूबर को नोटिस जारी होने और 7 अक्टूबर को सीमांकन की कार्रवाई प्रस्तावित होने अथवा आगे बढ़ाए जाने का उल्लेख किया गया है। पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि कहीं कार्रवाई के पीछे राजनीतिक दबाव तो नहीं था।
कांग्रेस ने मांग की है कि यदि जमीन के सीमांकन की आवश्यकता है, तो पूरी भूमि का नियमानुसार सीमांकन कराया जाए। सभी संबंधित पक्षों को पूर्व सूचना दी जाए और प्रक्रिया का विधिवत रिकॉर्ड तैयार किया जाए। पंचायत सचिव के स्थानांतरण के कारणों की जांच की मांग भी की गई है।
पंचायत और नगर निगम के कामों में हस्तक्षेप का आरोप
ज्ञापन में पंचायतों और नगर निगम के विकास कार्यों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को कमजोर करने और पसंदीदा ठेकेदारों से काम कराने के लिए दबाव डालने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पार्टी ने ठेकेदारों के चयन, कार्यादेश, भुगतान और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि विकास कार्य स्थानीय जरूरतों और निर्धारित नियमों के अनुसार होने चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
टूटी सड़कों और जलभराव से राहत की मांग
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की जर्जर सड़कों और बारिश में जलभराव की समस्या को भी ज्ञापन में शामिल किया गया है। कांग्रेस ने कहा है कि खराब सड़कों के कारण आम लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों और किसानों को परेशानी होती है। नवरात्रि जैसे धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पार्टी ने पूरे विधानसभा क्षेत्र की खराब सड़कों का सर्वे कराने, दुर्घटना की आशंका वाले मार्गों की तत्काल मरम्मत और निर्माण कार्यों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की मांग की है।
इसी तरह जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे, नालियों की सफाई और स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है। कांग्रेस का कहना है कि हर वर्ष सामने आने वाली इन समस्याओं का स्थायी समाधान होना चाहिए।
अवैध रेत-मुरुम उत्खनन पर खनिज विभाग की भूमिका की जांच
कांग्रेस ने क्षेत्र में कथित अवैध रेत और मुरुम उत्खनन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में खदानों की अनुमति, उत्खनन की मात्रा, परिवहन और रॉयल्टी के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है।
पार्टी ने सवाल किया है कि यदि बिना आवश्यक अनुमति उत्खनन हुआ है, तो संबंधित विभाग ने समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की। कांग्रेस ने खनिज विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने, शासन को हुई संभावित राजस्व हानि का आकलन करने और अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार वसूली की मांग की है।
गरीबों के मकान और बिजली बिल का मुद्दा भी उठाया
ज्ञापन में गरीब परिवारों के मकानों पर हुई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई की वैधानिकता की समीक्षा करने की मांग की गई है। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी कार्रवाई में कानून का पालन जरूरी है, लेकिन प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सूचना और सुनवाई का अवसर भी मिलना चाहिए। पात्र परिवारों के लिए राहत और पुनर्वास की संभावनाओं पर विचार करने की मांग की गई है।
इसके अलावा बिजली बिलों में अधिक राशि आने और बिलिंग संबंधी त्रुटियों की शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष शिविर लगाने की मांग की गई है। पार्टी ने कहा है कि गलत बिलों की जांच कर उपभोक्ताओं को समय पर राहत दी जानी चाहिए।
कांग्रेस भवन की घटना की जांच की मांग
बिलासपुर के इंदिरा कांग्रेस भवन में भाजपा महिला मोर्चा के प्रदर्शन को लेकर भी कांग्रेस ने ज्ञापन में आपत्ति दर्ज की है। पार्टी ने कार्यालय परिसर में प्रवेश, नारेबाजी और बैनर-पोस्टर लगाने की घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल के कार्यालय में कानून और निर्धारित मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। पार्टी ने कहा है कि यदि कानून का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों पर दबाव और तबादले की धमकियों की जांच हो
कांग्रेस ने शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित राजनीतिक दबाव तथा प्रतिशोधपूर्ण स्थानांतरण की शिकायतों की जांच कराने की मांग भी की है। ज्ञापन में कहा गया है कि अधिकारियों को नियमों के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करने का वातावरण मिलना चाहिए।
पार्टी ने बेलतरा तहसीलदार, संबंधित राजस्व अधिकारियों और खनिज विभाग के अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग की है। साथ ही सभी शिकायतों पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी देने और प्रत्येक मांग के निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित करने की बात कही है।
चुनावी जनादेश का हवाला देकर उठाए सवाल
ज्ञापन के अंतिम हिस्से में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में मिले समर्थन का हवाला देते हुए कहा है कि चुनाव जीतना जनसेवा की जिम्मेदारी देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि दूसरे राजनीतिक विचारों वाले लोगों की समस्याओं को अनसुना किया जाए।
कांग्रेस ने अपने पक्ष में 65 हजार से अधिक और बहुजन समाज पार्टी के पक्ष में 15 हजार से अधिक मत मिलने का उल्लेख किया है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और निर्वाचित प्रतिनिधि की आवाज का सम्मान होना चाहिए।
कांग्रेस की प्रमुख मांग है कि ज्ञापन में उठाए गए सभी 17 बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और कार्रवाई की लिखित जानकारी दी जाए। अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच की दिशा महत्वपूर्ण होगी। वहीं, भाजपा विधायक सुशांत खिलाफ का पक्ष सामने आने के बाद आरोपों और उनके जवाब के आधार पर विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ज्ञापन
बेलतरा बदलापुर क्यों बन गया है?
विधायक के कथित दबाव में प्रशासन इतना असहज क्यों है—आखिर प्रशासन की क्या मजबूरी है?
सेवा में,
माननीय कलेक्टर महोदय,
जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
विषय: बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में कथित राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक भेदभाव, जनप्रतिनिधियों की प्रताड़ना, बदहाल सड़कों, अवैध रेत-मुरुम उत्खनन, जलभराव, गरीब परिवारों के मकानों पर कार्रवाई, बिजली बिलों की समस्याओं एवं अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच कर जनहित में ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई किए जाने बाबत।
महोदय,
बेलतरा बदलापुर क्यों बन गया है? विधायक के कथित दबाव में प्रशासन इतना असहज क्यों है? आखिर प्रशासन की ऐसी क्या मजबूरी है कि जनता की समस्याओं और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बीच बार-बार प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं?
आज बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की जनता स्वयं से यही सवाल पूछ रही है। जिस प्रशासन से जनता न्याय, सुरक्षा, विकास और निष्पक्षता की उम्मीद करती है, उसी प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के मन में असंतोष और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
जनता जानना चाहती है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियाँ हैं, जिनके कारण क्षेत्र के विधायक की कार्यशैली, कथित राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं? क्या प्रशासन स्वतंत्र रूप से संविधान, कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार निर्णय ले पा रहा है, या फिर राजनीतिक दबाव की आशंका के कारण अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असहज है?
बेलतरा की जनता का सीधा सवाल है—प्रशासन की मजबूरी क्या है? यदि सभी कार्य नियमों के अनुसार हो रहे हैं, तो जनता की शिकायतों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं पर स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है?
आज बेलतरा की वास्तविक तस्वीर चिंताजनक है। एक ओर सड़कें जर्जर हैं, बारिश में जलभराव से आम नागरिक परेशान हैं, अवैध रेत-मुरुम उत्खनन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, गरीब परिवार अपने आशियाने को लेकर चिंतित हैं और बिजली बिलों का बोझ आम जनता की परेशानी बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस विचारधारा से जुड़े निर्वाचित पंचायत एवं नगर निगम प्रतिनिधियों को कथित रूप से परेशान करने, पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप करने तथा अधिकारियों-कर्मचारियों पर दबाव डालने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
जनता ने विधायक को क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है, प्रशासन को अपनी राजनीतिक इच्छा के अनुसार चलाने का अधिकार नहीं। विधायक का पद जनसेवा का माध्यम है, न कि किसी को डराने, दबाव बनाने या राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करने का साधन।
हमारा सवाल स्पष्ट है—बेलतरा में विकास की चर्चा कम और राजनीतिक प्रतिशोध की शिकायतें अधिक क्यों सुनाई दे रही हैं? जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासनिक व्यवस्था को विवादों और दबाव की राजनीति में क्यों घसीटा जा रहा है?
इन्हीं गंभीर सवालों और जनहित से जुड़े विषयों को लेकर हम आपके समक्ष यह ज्ञापन प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के प्रति दुर्भावना नहीं, बल्कि बेलतरा की जनता को न्याय दिलाना, प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना और क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान कराना है।
अतः आपसे अनुरोध है कि निम्नलिखित सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जाँच कराकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा प्रत्येक माँग पर समयबद्ध निर्णय लिया जाए।
प्रमुख जनसमस्याएँ एवं हमारी माँगें
- बेलतरा को राजनीतिक प्रतिशोध नहीं, विकास चाहिए
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक के कथित राजनीतिक दबाव, बदले की भावना से कार्रवाई किए जाने तथा कांग्रेस विचारधारा से जुड़े निर्वाचित पंचायत एवं नगर निगम प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव की शिकायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं को उठाना और विकास कार्यों की निगरानी करना है। यदि किसी जनप्रतिनिधि या नागरिक के विरुद्ध शिकायत है, तो उस पर निष्पक्ष जाँच और वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को परेशान करना, विकास कार्यों से वंचित रखना या प्रशासनिक कार्रवाई का निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
माँग: राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक भेदभाव और प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी अधिकारी राजनीतिक दबाव में कार्य न करे और सभी नागरिकों एवं निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार हो।
- बिलासपुर कांग्रेस भवन की घटना की निष्पक्ष जाँच हो
बिलासपुर स्थित कांग्रेस भवन में महिला नेत्रियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा बिना पूर्व अनुमति प्रवेश करने, नारेबाजी करने तथा बैनर, पोस्टर एवं तख्तियाँ लगाने की घटना को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज की गई है।
लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में अनधिकृत प्रवेश कर हंगामा करने की शिकायत की निष्पक्ष जाँच भी आवश्यक है। विरोध के नाम पर किसी भी पक्ष को कानून और लोकतांत्रिक मर्यादा की सीमाएँ लाँघने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
माँग: घटना से संबंधित तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और जिम्मेदार व्यक्तियों की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। यदि किसी प्रकार का कानून उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। घटना के पीछे किसी प्रकार के राजनीतिक उकसावे या दबाव की भूमिका होने की शिकायत की भी जाँच की जाए।
- ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एवं सरपंच धनंजय सिंह के सीमांकन प्रकरण की जाँच हो
बेलतरा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, लगातार चार बार निर्वाचित सरपंच, सरपंच संघ के अध्यक्ष तथा बेलतरा विधानसभा से कांग्रेस के विधायक प्रत्याशी रहे विजय केशरवानी के चुनाव संचालक धनंजय सिंह से संबंधित सीमांकन प्रकरण में गंभीर सवाल उठे हैं।
धनंजय सिंह के परिवार की लगभग 45 एकड़ भूमि एक ही स्थान पर स्थित है, जिस पर वर्तमान में फसल लगी होने की जानकारी दी गई है। शिकायत के अनुसार, विधायक के कथित राजनीतिक दबाव में खड़ी फसल वाली भूमि का सीमांकन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। आरोप है कि पहले उचित पूर्व सूचना के बिना सीमांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, इसके बाद 6 अक्टूबर को नोटिस जारी किया गया और 7 अक्टूबर को पुनः सीमांकन की कार्रवाई प्रस्तावित की गई अथवा आगे बढ़ाई गई।
यदि किसी शासकीय भूमि या सीमांकन से संबंधित शिकायत की जाँच आवश्यक है, तो वह पारदर्शी, निष्पक्ष और समान मानदंडों के अनुसार होनी चाहिए। किसी व्यक्ति की राजनीतिक भूमिका या विचारधारा के कारण उसकी भूमि को चुनिंदा रूप से निशाना बनाए जाने की आशंका की भी जाँच होनी चाहिए।
हमारी माँग है कि यदि शासकीय भूमि अथवा सीमांकन से संबंधित जाँच आवश्यक है, तो धनंजय सिंह के परिवार की एक ही स्थान पर स्थित लगभग 45 एकड़ भूमि का भी नियमानुसार पूर्ण सीमांकन कराया जाए। सभी संबंधित पक्षों को पूर्व सूचना दी जाए, स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा पूरी प्रक्रिया का विधिवत अभिलेखीकरण किया जाए।
माँग: सीमांकन प्रक्रिया, पूर्व सूचना, 6 अक्टूबर के नोटिस तथा 7 अक्टूबर को प्रस्तावित अथवा की गई कार्रवाई की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। यह भी जाँचा जाए कि क्या किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव था। पंचायत सचिव के स्थानांतरण के कारणों की समीक्षा की जाए और किसी भी प्रकार का नियमविरुद्ध हस्तक्षेप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- पंचायत एवं नगर निगम के विकास कार्यों में कथित हस्तक्षेप बंद हो
पंचायतों एवं नगर निगम के कार्यों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को कमजोर करने तथा कथित रूप से पसंदीदा ठेकेदारों से कार्य कराने के लिए दबाव डालने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
गाँवों और वार्डों के विकास का निर्णय स्थानीय आवश्यकताओं, निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए। जनता के पैसे से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने दिया जाता, तो उसका नुकसान अंततः आम जनता को उठाना पड़ता है।
माँग: पंचायत एवं नगर निगम के कार्यों में ठेकेदारों के चयन, कार्यादेश, भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप की जाँच कराई जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई हो तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों को नियमानुसार स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए।
- पूरे बेलतरा की टूटी सड़कों की मरम्मत कराई जाए
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में टूटी और जर्जर सड़कों की समस्या आम जनता के लिए गंभीर परेशानी बन गई है। सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि बच्चों के स्कूल पहुँचने, मरीजों के अस्पताल जाने, किसानों के अपनी उपज ले जाने और आम नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी बुनियादी सुविधा हैं।
नवरात्रि जैसे पावन पर्व पर भी श्रद्धालुओं को माँ दुर्गा के दर्शन के लिए पैदल चलने की मजबूरी का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को टूटी सड़कों, कीचड़ तथा असुरक्षित आवागमन के कारण होने वाली परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बेलतरा की जनता को केवल विकास के दावे नहीं, बल्कि धरातल पर सुरक्षित और मजबूत सड़कें चाहिए। आखिर सड़कों की दुर्दशा सामने होने के बावजूद मरम्मत एवं निर्माण के कार्य समय पर क्यों नहीं हो रहे हैं?
माँग: पूरे बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की जर्जर सड़कों का सर्वे कराकर सूची सार्वजनिक की जाए। दुर्घटना की आशंका वाले मार्गों की तत्काल मरम्मत हो और सभी खराब सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए। धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए।
- अवैध रेत-मुरुम उत्खनन पर रोक लगे, खनिज विभाग की भूमिका की जाँच हो
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में रेत एवं मुरुम के कथित अवैध उत्खनन को लेकर गंभीर शिकायतें हैं। यदि बिना वैध अनुमति या निर्धारित शर्तों का उल्लंघन कर उत्खनन किया जा रहा है, तो इससे सरकारी राजस्व, पर्यावरण और स्थानीय जनता के हितों को नुकसान पहुँच सकता है।
इस मामले में खनिज विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मुरुम उत्खनन से संबंधित शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में विभागीय निगरानी और अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जाँच आवश्यक है।
यदि इस वर्ष मुरुम उत्खनन से संबंधित रॉयल्टी जमा नहीं हुई है अथवा निर्धारित रॉयल्टी से कम राशि जमा कराकर उत्खनन किया गया है, तो शासन को हुई संभावित राजस्व हानि का आकलन कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसी प्रकार, संबंधित खदानों के लिए जिला प्रशासन या सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त होने अथवा न होने की भी जाँच होनी चाहिए।
जनता का सवाल है कि यदि बिना अनुमति उत्खनन हो रहा था, तो संबंधित विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? बार-बार शिकायतों के बावजूद उत्खनन जारी रहने की स्थिति में विभागीय जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
माँग: संबंधित क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कराया जाए। मुरुम खदानों की अनुमति, सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति, अन्य वैधानिक अनुमतियों, उत्खनन की मात्रा, परिवहन, रॉयल्टी और संबंधित अभिलेखों की जाँच की जाए। शासन को राजस्व हानि प्रमाणित होने पर नियमानुसार वसूली की जाए। बिना आवश्यक अनुमति संचालित खदानों पर तत्काल नियमानुसार रोक लगाई जाए तथा जिम्मेदार व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
- बारिश में जलभराव से राहत और स्थायी निकासी व्यवस्था हो
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में बारिश के दौरान जलभराव और खराब निकासी व्यवस्था से लोगों को परेशानी होती है। घरों, दुकानों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर पानी भरने से दैनिक जीवन प्रभावित होता है और कई परिवारों के लिए आवागमन तक मुश्किल हो जाता है।
बारिश के समय जलभराव केवल असुविधा नहीं, बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक नुकसान, घरों के सामान की बर्बादी, बच्चों की सुरक्षा और बीमार लोगों को अस्पताल पहुँचाने जैसी गंभीर समस्याएँ भी पैदा करता है।
हर वर्ष एक जैसी समस्याएँ सामने आने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
माँग: जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए, नालियों एवं जल निकासी मार्गों की सफाई और मरम्मत सुनिश्चित की जाए तथा स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए। लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय की जाए।
- गरीब परिवारों के मकानों पर कार्रवाई में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए
गरीब परिवारों के मकानों पर कार्रवाई का मामला अत्यंत संवेदनशील है। किसी भी निर्माण या अतिक्रमण के मामले में कानून का पालन आवश्यक है, लेकिन प्रभावित परिवारों को उचित सूचना, सुनवाई और नियमानुसार प्रक्रिया का अवसर भी मिलना चाहिए।
किसी गरीब परिवार का घर केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं होता। वह वर्षों की मेहनत, जीवनभर की बचत, बच्चों के भविष्य और परिवार की सुरक्षा का आधार होता है। ऐसे में मकान पर कार्रवाई की आशंका भी परिवारों के लिए गहरा मानसिक और आर्थिक संकट पैदा कर सकती है।
यदि किसी परिवार के मकान पर कार्रवाई में चयनात्मक व्यवहार, राजनीतिक भेदभाव या दुर्भावना की शिकायत है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और प्रशासनिक कार्रवाई में मानवीय संवेदनशीलता बनी रहनी चाहिए।
माँग: बेलतरा क्षेत्र में गरीब परिवारों के मकानों पर हुई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई की वैधानिकता और निष्पक्षता की समीक्षा की जाए। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सुनवाई का अवसर दिया जाए तथा पात्र परिवारों के लिए उपलब्ध राहत एवं पुनर्वास की संभावनाओं पर विचार किया जाए।
- बढ़ते बिजली बिलों से परेशान जनता को राहत मिले
बिजली बिलों में अधिक राशि आने और बिलिंग संबंधी त्रुटियों की शिकायतों से आम परिवारों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। महँगाई के इस दौर में गरीब, मध्यमवर्गीय परिवार, मजदूर और छोटे दुकानदार पहले ही आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
कई परिवारों के लिए बिजली का बिल महीने का बजट बिगाड़ देने वाला अतिरिक्त बोझ बन जाता है। यदि गलत मीटर रीडिंग या बिलिंग संबंधी त्रुटियों के कारण लोगों से अधिक राशि माँगी जा रही है, तो उसका समय पर निराकरण होना चाहिए।
माँग: बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में बिजली बिल संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएँ। गलत बिलों की जाँच कर नियमानुसार सुधार किया जाए और उपभोक्ताओं को पारदर्शी एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- शासकीय कर्मचारियों पर कथित राजनीतिक दबाव एवं स्थानांतरण की धमकियों की जाँच हो
शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों का दायित्व कानून, नियम और शासन के निर्देशों के अनुसार कार्य करना है। यदि किसी कर्मचारी को नियमसम्मत कार्य करने पर राजनीतिक दबाव, धमकी या स्थानांतरण की आशंका का सामना करना पड़ता है, तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता के लिए गंभीर विषय है।
स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकता और निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत नाराजगी या राजनीतिक प्रतिशोध के आधार पर। किसी अधिकारी या कर्मचारी को नियमों के अनुसार कार्य करने के कारण प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।
माँग: बेलतरा क्षेत्र में राजनीतिक दबाव, धमकी अथवा प्रतिशोध के आधार पर स्थानांतरण एवं कार्रवाई से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। आरोप प्रमाणित होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा अधिकारियों-कर्मचारियों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष कार्य करने का वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
- बेलतरा तहसीलदार एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जाँच हो
बेलतरा तहसील क्षेत्र में भूमि, सीमांकन, राजस्व कार्रवाई और कथित अवैध उत्खनन से जुड़े मामलों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
राजस्व अभिलेखों, सीमांकन प्रक्रियाओं, खनिज संबंधी अनुमतियों, निरीक्षणों और शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जाँच कराई जानी चाहिए। यदि किसी मामले में शिकायतों की अनदेखी, पक्षपात, नियमविरुद्ध कार्रवाई या किसी प्रभावशाली व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुँचाने की बात सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
माँग: बेलतरा तहसीलदार सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों और खनिज विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जाँच किसी निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। सभी संबंधित अभिलेखों की समीक्षा हो और अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी मामले में राजनीतिक दबाव के कारण निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित न हो।
हमारी 17 प्रमुख माँगें
उपरोक्त जनसमस्याओं के समाधान के लिए हम जिला प्रशासन से निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की माँग करते हैं—
- बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक के कथित राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक भेदभाव और प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
- बिलासपुर कांग्रेस भवन में अनधिकृत प्रवेश एवं हंगामे की घटना की जाँच कर कानून का उल्लंघन प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- धनंजय सिंह से संबंधित सीमांकन प्रक्रिया, पूर्व सूचना, 6 अक्टूबर के नोटिस, 7 अक्टूबर को प्रस्तावित अथवा की गई कार्रवाई और पंचायत सचिव के स्थानांतरण के मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
- यदि शासकीय भूमि अथवा सीमांकन की जाँच आवश्यक है, तो धनंजय सिंह के परिवार की एक ही स्थान पर स्थित लगभग 45 एकड़ भूमि का भी नियमानुसार पूर्ण सीमांकन कराया जाए तथा सभी संबंधित पक्षों को पूर्व सूचना दी जाए।
- पंचायत एवं नगर निगम के विकास कार्यों में ठेकेदारों के चयन, कार्यादेश, भुगतान, निर्माण गुणवत्ता और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप की जाँच की जाए।
- पूरे बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की जर्जर सड़कों का सर्वे कराकर तत्काल मरम्मत एवं समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
- नवरात्रि सहित धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक मार्गों की मरम्मत और समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- अवैध रेत-मुरुम उत्खनन की जाँच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- मुरुम खदानों की अनुमति, रॉयल्टी, उत्खनन की मात्रा तथा शासन को हुई संभावित राजस्व हानि की जाँच कर नियमानुसार वसूली की जाए।
- खनिज विभाग के अधिकारियों की भूमिका तथा शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के मामलों की जाँच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाए।
- बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति संचालित मुरुम खदानों पर नियमानुसार तत्काल रोक लगाई जाए।
- जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुँचाई जाए तथा स्थायी जल निकासी व्यवस्था के लिए समयबद्ध कार्ययोजना लागू की जाए।
- गरीब परिवारों के मकानों पर हुई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई की वैधानिकता एवं निष्पक्षता की समीक्षा कर पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत प्रदान की जाए।
- बिजली बिल संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष शिविर लगाकर गलत बिलों में सुधार किया जाए।
- शासकीय कर्मचारियों को कथित राजनीतिक दबाव, धमकी और प्रतिशोधपूर्ण स्थानांतरण से बचाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
- बेलतरा तहसीलदार, संबंधित राजस्व अधिकारियों तथा खनिज विभाग के अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच कर अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- इस ज्ञापन में उल्लिखित प्रत्येक शिकायत पर की गई जाँच, निर्णय और कार्रवाई की लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा प्रत्येक माँग के निराकरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए।
अंत में—बेलतरा की जनता के जनादेश के नाम एक सवाल
**विजय केशरवानी, बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का विधायक प्रत्याशी रहे **है विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 65,000 से अधिक मतदाताओं ने अपना समर्थन दिया, वहीं बहुजन समाज पार्टी को भी 15,000 से अधिक मत प्राप्त हुए। ये आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि बेलतरा की जनता की राजनीतिक पसंद विविध है और हजारों परिवारों ने अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं एवं प्रतिनिधियों पर भरोसा जताया है।
आज बेलतरा में भाजपा के विधायक हैं। लोकतंत्र में लेकिन चुनावी जीत का अर्थ यह नहीं कि पूरे क्षेत्र की जनता ने उन्हें समर्थन दिया है या उन्हें जनता की आवाज अनसुनी करने का अधिकार मिल गया है।
चुनाव जीतना जनसेवा की जिम्मेदारी देता है, जनता पर राजनीतिक दबाव बनाने का अधिकार नहीं।
बेलतरा की जनता ने किसी को भी अपनी समस्याओं से मुँह मोड़ने, प्रशासन को कथित दबाव में रखने या राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करने का जनादेश नहीं दिया है। जनता ने विधायक को विकास करने के लिए चुना है, न कि विकास के सवाल उठाने वालों को परेशान करने के लिए।
यदि कांग्रेस के निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता की समस्याएँ उठाते हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। यदि कोई सरपंच अपने गाँव के विकास की बात करता है, तो उसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि कोई अधिकारी नियमों के अनुसार कार्य करता है, तो उसे किसी राजनीतिक नाराजगी या स्थानांतरण की आशंका में काम करने के लिए विवश नहीं होना चाहिए।
जनता का समर्थन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। लोकतंत्र में हर वोट की अपनी आवाज है और हर नागरिक के सम्मान की रक्षा करना जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है
अतः हम जिला प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जाँच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा प्रत्येक माँग पर लिखित एवं समयबद्ध जवाब दिया जाए।
बेलतरा की जनता को आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए। बयान नहीं, विकास चाहिए। राजनीतिक दबाव नहीं, निष्पक्ष प्रशासन चाहिए।
बेलतरा की जनता की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता। जनता के सवालों का जवाब देना ही लोकतंत्र और जनसेवा की असली कसौटी है।
भवदीय
समस्त कांग्रेस जन बेलतरा व
जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर, छत्तीसगढ़
