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बिलासपुर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन…कलेक्ट्रेट घेराव से पहले नेहरू चौक पर रोके गए कांग्रेसी, बैरिकेड्स पर चढ़े विजय , टीन की दीवार तोड़ने की कोशिश; वाटर कैनन से पानी की बौछार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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कांग्रेस नेता विजय केसरवानी।

विधायक के दबाव, जनप्रतिनिधियों की कथित प्रताड़ना और अवैध उत्खनन के खिलाफ कांग्रेस का विरोध मार्च, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर झूमाझटकी

बिलासपुर। बिलासपुर में कलेक्ट्रेट घेराव करने जा रहे कांग्रेसियों को पुलिस ने नेहरू चौक के पास ही रोक दिया। कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने से रोके जाने पर प्रदर्शनकारी आक्रोशित हो उठे और पुलिस की ओर से लगाई गई टीन की दीवार तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। देखते ही देखते मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। कांग्रेसियों और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की और झूमाझटकी हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछार की। पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केसरवानी समेत कई कांग्रेसी नेता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। कलेक्ट्रेट घेराव से पहले ही पुलिस और कांग्रेसियों के बीच टकराव ने प्रदर्शन को उग्र बना दिया।

स्थानीय विधायक के दबाव में पंचायत एवं नगर निगम के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को कथित प्रशासनिक प्रताड़ना दिए जाने, विकास कार्यों में भेदभाव, बदले की राजनीति और क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध उत्खनन के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी (शहर एवं ग्रामीण) ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को कांग्रेस भवन से कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विजय केसरवानी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। कांग्रेस का इरादा कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव करने और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का था, लेकिन पुलिस ने नेहरू चौक के पास ही बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले पुलिस ने रोका, नेहरू चौक पर बढ़ा तनाव

कांग्रेस के विरोध मार्च को देखते हुए पुलिस ने कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। नेहरू चौक के पास टीन की दीवार खड़ी करने के साथ बैरिकेड्स लगाए गए थे, ताकि प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने से रोका जा सके। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन और दमकल वाहन भी मौजूद थे।

जैसे ही कांग्रेसियों को बैरिकेडिंग के आगे बढ़ने से रोका गया, प्रदर्शन स्थल पर नारेबाजी और विरोध तेज हो गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई, जब कांग्रेसियों ने टीन की दीवार को तोड़ने का प्रयास किया।

टीन की दीवार तोड़ने की कोशिश, वाटर कैनन से पानी की बौछार

नेहरू चौक पर पुलिस की घेराबंदी तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। दोनों पक्षों के बीच जमकर झूमाझटकी हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कांग्रेसियों पर पानी की बौछार की। इसके बावजूद प्रदर्शन स्थल पर काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।

पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी समेत कई कांग्रेसी नेता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की ओर से बनाई गई सुरक्षा व्यवस्था को पार कर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने का प्रयास किया। पुलिसकर्मी लगातार प्रदर्शनकारियों को रोकने में जुटे रहे। कलेक्ट्रेट घेराव से पहले नेहरू चौक पर ही कांग्रेस और पुलिस के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला।

विधायक के दबाव और जनप्रतिनिधियों की कथित प्रताड़ना के खिलाफ प्रदर्शन

कांग्रेस ने इस विरोध मार्च के जरिए स्थानीय विधायक पर दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ कथित प्रशासनिक प्रताड़ना का मुद्दा उठाया। पार्टी का आरोप है कि पंचायत एवं नगर निगम के जनप्रतिनिधियों को परेशान किया जा रहा है और विकास कार्यों में भेदभाव बरता जा रहा है। कांग्रेस ने इसे बदले की राजनीति बताते हुए प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया था।

प्रदर्शन में क्षेत्र में कथित अवैध उत्खनन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध उत्खनन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। पार्टी ने इन मामलों में जवाबदेही तय करने और जनप्रतिनिधियों के साथ कथित भेदभाव बंद करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव का कार्यक्रम रखा था।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, घेराव से पहले ही आमने-सामने आए पुलिस और कांग्रेसी

कांग्रेस के मार्च को देखते हुए पुलिस ने पहले से ही नेहरू चौक और कलेक्ट्रेट मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। टीन की दीवार, बैरिकेड्स और भारी पुलिस बल के जरिए प्रदर्शनकारियों को रोकने की तैयारी की गई थी। वाटर कैनन की तैनाती भी इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थी।

हालांकि, कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही कांग्रेसियों को रोकने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। टीन की दीवार तोड़ने के प्रयास, बैरिकेड्स पर चढ़े नेताओं और वाटर कैनन से पानी की बौछार के बीच विरोध मार्च ने उग्र रूप ले लिया। विजय केसरवानी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन ने बिलासपुर की राजनीति में हलचल तेज कर दी। कांग्रेस ने विधायक के दबाव, जनप्रतिनिधियों की कथित प्रताड़ना, विकास कार्यों में भेदभाव और अवैध उत्खनन जैसे मुद्दों को लेकर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध बुलंद किया।

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