
अरपा अर्पण महाअभियान के आयोजन में उमड़ा श्रद्धा का भाव, संत रामरूपदास महात्यागी ने प्रकृति सेवा को बताया सबसे बड़ा धर्म
बिलासपुर। शारदीय नवरात्रि के प्रथम पावन दिवस पर रविवार शाम अरपा नदी के तट पर भक्ति, आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। अरपा अर्पण महाअभियान ‘जन आंदोलन’ की ओर से आयोजित मां अरपा की महाआरती में भक्तों ने पूरे श्रद्धाभाव से हिस्सा लिया। शाम 7:15 बजे पांच वेदपाठी आचार्यों ने विधि-विधान से महाआरती प्रारंभ की। इस दौरान पूरा परिसर ‘जय-जय अरपा मैया’ के जयकारों से गूंज उठा। गूगल और हवन सामग्री की सुगंध से अरपा तट का वातावरण भक्तिमय हो गया।
महाआरती के माध्यम से मां अरपा के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने के साथ ही नदियों के संरक्षण, पौधारोपण और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया। आयोजन में बिलासपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने नदी और प्रकृति के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रकृति में मां का स्वरूप, उसकी सेवा सबसे बड़ा धर्म
रामाश्रय श्रीहरिहर क्षेत्र मदकू के संत रामरूपदास महात्यागी, प्रदेशाध्यक्ष सर्व संत समाज छत्तीसगढ़ ने जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रकृति को मां का स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। नदियां, पेड़-पौधे और पर्यावरण मानव जीवन के आधार हैं। इनका संरक्षण करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
महाअभियान के अध्यक्ष एवं संस्थापक श्याम मोहन दुबे ने लोगों से नदियों को स्वच्छ रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि नदी में कचरा, फूल-माला या अन्य पूजन सामग्री नहीं डालनी चाहिए। जब लोग नदियों को गंदा करना बंद कर देंगे, तो उन्हें स्वच्छ बनाए रखने का काम आसान हो जाएगा।
उन्होंने पेड़-पौधों पर पिन, कील या विज्ञापन सामग्री लगाने से भी बचने की अपील की। इससे पेड़ों को नुकसान पहुंचता है और उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण के साथ पौधों की नियमित देखभाल करना भी जरूरी है।
‘आप गंदा न करें, सफाई हो जाएगी’
डॉ. श्रीश मिश्रा ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा, “आप गंदा न करें, सफाई हो जाएगी। आप पेड़-पौधों को न काटें, हरियाली आ जाएगी और आप अपने आप को बदलें, सब अपने आप बदल जाएंगे।”
उन्होंने लोगों से अपने व्यवहार में बदलाव लाकर स्वच्छता और हरियाली को जनजीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
दीपों से लिखा ‘जय-जय अरपा मैया’
महाआरती के दौरान महाअभियान परिवार की ओर से दीपों के माध्यम से ‘जय-जय अरपा मैया’ लिखा गया। श्री ललित के नेतृत्व में भजन मंडली ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। पांच वेदपाठी आचार्यों ने विधि-विधान से मां अरपा की महाआरती की। श्रद्धालुओं ने मां अरपा से बिलासपुर सहित समस्त विश्व की शांति, सुख, स्वास्थ्य और सदाचरण की कामना की।
आयोजकों ने कहा कि मां अरपा की महाआरती केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवनदायिनी नदी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उसके संरक्षण के लिए समाज को जागरूक करने का माध्यम है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को बिलासपुरवासियों का सौभाग्य बताते हुए उन्होंने इसे मां अरपा की अनुकंपा बताया।
महाआरती को सफल बनाने में इनका रहा योगदान
आयोजन को सफल बनाने में श्री जय पाठक, श्री दिग्विजय पाठक, श्रीमती सीमा चतुर्वेदी, श्रीमती पराग यादव, सुश्री वर्षा ताम्रकार, सुश्री डिगेश्वरी, डॉ. सुजाता पाण्डेय, डॉ. रवि पटेल, श्री गौरव तिवारी, श्री जयेश तिवारी, श्री राजा समदरीया, श्री विशाल धीवर, श्री पवन श्रीवास्तव, श्री जयंत श्रीवास्तव, श्री बसंत जायसवाल, श्री राजकुमार जायसवाल, श्री संजय जायसवाल, श्री विठ्ठल पटेल, श्री अनिल यादव, श्री आशुतोष शर्मा और श्री आशुतोष तिवारी सहित अरपा अर्पण महाअभियान परिवार के सदस्यों का योगदान रहा।
